भारत की तीन सबसे पवित्र और विशाल नदियों—दक्षिण में गंगा, दक्षिण-पश्चिम में घाघरा (सरयू) तथा पूर्व में गंडक (नारायणी) से घिरा सारण जिला उपजाऊ जलोढ़ मैदानों, पवित्र संगमों और समृद्ध दियारा संस्कृति की धरती है।
प्राकृतिक जिले की सीमाएं
धार्मिक एवं ऐतिहासिक तीर्थ
आंतरिक सिंचाई व जल निकासी
अति उपजाऊ जलोढ़ माटी
भारत की सबसे पवित्र नदी
पवित्र गंगा नदी सारण जिले की संपूर्ण दक्षिणी सीमा बनाती है। यह पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हुई सारण को भोजपुर (आरा) और पटना जिलों से अलग करती है। डोरीगंज में सरयू और सोनपुर में गंडक नदी गंगा में समाहित होती हैं।
अयोध्या एवं छपरा नगर की जीवनधारा
बिहार-यूपी सीमा पर मांझी के निकट सारण में प्रवेश करने वाली घाघरा (सरयू) दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर बहती है। छपरा नगर इसी के उत्तरी तट पर स्थित है। यह रिविलगंज और डोरीगंज के समीप गंगा में विलीन होती है।
शालीग्राम शिलाओं की पावन नदी
सारण की संपूर्ण पूर्वी सीमा बनाने वाली गंडक नदी (बड़ी गंडक / नारायणी) सारण को मुजफ्फरपुर एवं वैशाली जिलों से पृथक करती है। यह सारण नहर प्रणाली को जल प्रदान कर सोनपुर में गंगा से मिलती है।
तीन विशाल सीमावर्ती नदियों के अतिरिक्त सारण के भीतरी ग्रामीण अंचलों में कई ऐतिहासिक उपनदियां और बरसाती नदियां प्रवाहित होती हैं:
माही नदी सारण-सीवान सीमा से निकलकर मध्य सारण के बनियापुर, जलालपुर, गरखा, मढ़ौरा और दरियापुर प्रखंडों से होकर बहती है। यह सैकड़ों गांवों के खेतों की सिंचाई और भूजल पुनर्भरण का मुख्य आधार है।
खौरा नदी एकमा, लहलादपुर, बनियापुर और आसपास के क्षेत्रों से गुजरती है। मानसून में यह अतिरिक्त जल को प्राकृतिक चौड़ों (Chours) तक पहुंचाकर धान की फसलों को सिंचित करती है।
सीवान से सारण के मांझी और एकमा सीमा में प्रवेश करने वाली ये जलधाराएं सरयू बेसिन के साथ मिलकर पश्चिमी सारण के तालाबों और आर्द्रभूमियों को समृद्ध करती हैं।
घोघारी नदी उत्तर सारण में प्रवेश कर मशरक, पानापुर, तरैया और मढ़ौरा (Madhaurah) प्रखंडों से होकर बहती है तथा आगे अमनौर की ओर जल निकासी तंत्र से जुड़ती है। यह हजारों किसानों के लिए प्राकृतिक सिंचाई का मुख्य आधार है और मानसूनी जलभराव को चौड़ों तक ले जाती है।
सोंधी नदी तरैया, अमनौर, परसा और दरियापुर से गुजरती है। यह गंडक की प्राचीन शाखा है जो हरदिया चौर सहित कई बड़े जलाशयों को जोड़ती है तथा मत्स्य पालन और रबी फसलों के लिए वरदान है।
सोनपुर में गंडक (नारायणी) और गंगा का संगम सनातन संस्कृति के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार यह गजेंद्र मोक्ष की ऐतिहासिक पावन भूमि है।
अयोध्या से प्रवाहित होने वाली घाघरा (सरयू) डोरीगंज और सेमरिया घाट के समीप गंगा में समाहित होती है। यह संगम रामायण और वैदिक काल से जुड़ा है।
डोरीगंज के पास गंगा पर स्थित यह पुल सारण को सीधे भोजपुर (आरा) और दक्षिण बिहार से जोड़ता है।
गंगा नदी पर निर्मितगंगा नदी पर 4.55 किमी लंबा विशाल रेल-सह-सड़क सेतु जो सोनपुर (सारण) को राजधानी पटना (दीघा) से जोड़ता है।
गंगा नदी पर निर्मितमांझी के पास घाघरा (सरयू) नदी पर बना पुल जो सारण (बिहार) को बलिया (उत्तर प्रदेश) से NH-31 पर जोड़ता है।
सरयू नदी पर निर्मितगंडक नदी पर स्थित पुल जो सोनपुर को हाजीपुर (वैशाली) तथा रेवा घाट पुल सारण को मुजफ्फरपुर से जोड़ते हैं।
गंडक नदी पर निर्मिततीन विशाल गाद-युक्त नदियों से घिरे होने के कारण सारण का दक्षिणी व पश्चिमी भाग प्रसिद्ध दियारा (Diara) क्षेत्र का निर्माण करता है।
नदियों से सिंचित कृषि स्वर्ग
सारण जिले के नदी बेसिन, सिंचाई नहर नेटवर्क, जलस्तर आंकड़े और बाढ़ प्रबंधन संबंधी विवरण आधिकारिक सरकारी जल संसाधन एवं पर्यावरण एजेंसियों के संदर्भ पर आधारित हैं:
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